Copper Price update : कॉपर ऑल-टाइम हाई पर

कॉपर की कीमतें ऑल-टाइम हाई पर, वैश्विक महँगाई और सप्लाई चिंताओं से बाज़ार में हलचल

Copper prices hit an all-time high as global inflation and supply concerns

वैश्विक कमोडिटी मार्केट में तांबा (Copper) एक बार फिर सुर्खियों में है। अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर कॉपर की कीमतें इतिहास के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार विश्व भर में बढ़ती मांग, सीमित सप्लाई, महँगाई का दबाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने कॉपर को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है।

copper at all time High

कॉपर की कीमतों में तेज़ उछाल क्यों?

पिछले कुछ महीनों में कॉपर की मांग लगातार बढ़ी है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में बढ़ते उपयोग के कारण। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद निवेशकों का रुझान औद्योगिक धातुओं की ओर और भी मजबूत हुआ है। इससे कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ गईं।

दूसरी ओर, बाजार में सप्लाई की कमी का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। प्रमुख उत्पादक देशों—खासतौर पर चिली—में सप्लाई स्थिर रखने के लिए बड़े निवेश की योजना बन रही है, जो मौजूदा मांग को देखते हुए एक ज़रूरी कदम माना जा रहा है।

चिली की नई निवेश योजना से उम्मीदें

दुनिया के सबसे बड़े कॉपर उत्पादक देश चिली ने 2034 तक के लिए 105 बिलियन डॉलर से अधिक के खनन निवेश का नया अनुमान जारी किया है। इसका उद्देश्य भविष्य में कॉपर उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक सप्लाई में संतुलन लाना है।

हालाँकि विश्लेषकों का कहना है कि नए निवेश के परिणाम सामने आने में समय लगेगा, इसलिए फिलहाल बाजार में तांबे की कमी बनी रह सकती है।

 

ग्लोबल अनिश्चितता और महँगाई का असर

कॉपर को “इकॉनमी का थर्मामीटर” कहा जाता है, क्योंकि इसकी मांग दुनिया की आर्थिक सेहत को दर्शाती है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर—

  • भू-राजनीतिक तनाव,
  • महँगाई में लगातार उतार-चढ़ाव,
  • और आर्थिक अनुमान में अनिश्चितता

इन तीनों ने कॉपर को निवेशकों की पसंदीदा मेटल बना दिया है। सुरक्षित निवेश के विकल्प कम होने पर संस्थागत निवेशक तांबे पर ज्यादा दांव लगा रहे हैं।

बाज़ार के विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

कई मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में कॉपर की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा, लेकिन बिजलीकरण (Electrification) और हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के कारण इसकी लंबी अवधि की मांग मजबूत रहेगी।

दूसरी ओर, कुछ ग्लोबल बैंक 2026 में कीमतों में स्थिति सामान्य होने की संभावना भी जताते हैं, क्योंकि तब तक बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है और अतिरिक्त मांग का दबाव कम होगा।

भारत में कॉपर की हलचल

भारतीय कमोडिटी मार्केट भी वैश्विक ट्रेंड से अछूता नहीं है। MCX पर कॉपर वायदा कीमतों में लगभग 1% तक की वृद्धि देखी गई है। देश में इंडस्ट्रियल एक्टिविटी बढ़ने, डॉलर इंडेक्स में गिरावट और अंतर्राष्ट्रीय दामों में तेजी से घरेलू कीमतों पर सीधा असर पड़ा है।

ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए संकेत

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह समय—

  1. हाई वोलैटिलिटी
  2. ग्लोबल न्यूज़-ड्रिवन मूवमेंट्स
  3. सप्लाई शॉर्टेज का जोखिम

से जुड़ा हुआ है। इसलिए ट्रेडर्स को शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग में सतर्क रहने और ट्रेंड-फॉलोइंग रणनीतियों को अपनाने की सलाह दी जा रही है। वहीं लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए तांबा अभी भी मजबूत थीम माना जा रहा है, क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर-विंड ऊर्जा क्षेत्र में इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

कॉपर की कीमतों का ऑल-टाइम हाई पर पहुंचना सिर्फ एक कमोडिटी इवेंट नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक बदलावों का संकेत है। दुनिया हरित ऊर्जा और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की ओर बढ़ रही है, और तांबा इस परिवर्तन का केंद्र बन चुका है।

हालांकि भविष्य में कीमतों में सुधार संभव है, लेकिन वर्तमान स्थिति यह बताती है कि आने वाले वर्षों में कॉपर कमोडिटी मार्केट में सबसे प्रभावशाली धातुओं में रहेगा।

I’m a stock market trader with 8+ years of experience, specializing in chart analysis and trading psychology. I share my learnings in hindi to help others avoid common trading mistakes and build the right mindset for consistent profit.

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